☃बच्चों नें प्रयोग करते हुए सीखा उच्छवास तथा निश्वसन☃
बच्चों के अन्दर वैज्ञानिक सोच तथा स्वंय करके सीखनें के अवसर प्रदान करते हुए कम्पोजिट विद्यालय पेरई, नेवादा-कौशाम्बी जूनियर सेक्शन के बच्चों को सहयोगी विज्ञान शिक्षक  श्री चक्रपाणि मिश्र जी द्वारा सराहनीय प्रयास करते हुए शून्य निवेश में खाली बोतल और गुब्बारे की सहायता से वर्किंग माडल तैयार करते हुए श्वसन क्रिया उच्छवास तथा निश्वसन को समझानें का प्रयास किया तथा उनके द्वारा समझाते हुए कहा गया कि *प्रत्येक प्राणी साँस लेता है। सांस लेना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें प्राणी खाद्य अणुओं को ऑक्सीकृत करके कोशिकाओं के लिए ऊर्जा पैदा करता है। सांस क्रिया के फलस्वरूप पानी और कार्बन डाईऑक्साइड बनते हैं। ये दोनों ही अपशिष्ट पदार्थ हैं, जिन्हें शरीर से बाहर निकालना जरूरी है। शरीर में हवा के अंदर जाने व बाहर निकलने की क्रिया निरंतर होती रहती है। सांस द्वारा हवा को अंदर लेने और बाहर निकालने की क्रियाओं में एक संबंध होता है। श्वास लेने वाली क्रिया को उच्छ्वास (Inspiration) और निकालने की क्रिया को निश्वसन (E×piration) कहते हैं। मनुष्य एक मिनट में 15 से 17 बार सांस लेता है तथा सांस की क्रिया तीन पदों में पूरी होती है* इसके उपरान्त बच्चों को स्वंय माडल को दिया गया जिसके माध्यम से वे स्वंय बारी-बारी से प्रयोग करते हुए पूरी प्रक्रिया को समझा उसके उपरान्त बच्चों नें अपनी-अपनी प्रस्तुति भी दी।इस प्रकार आज के सम्पूर्ण कक्षा शिक्षण में बच्चों नें रूचि के साथ स्वंय करके  सीखनें का प्रयास किया।
साभार
हरीओमसिंह(प्रधानाध्यापक)
कम्पोजिट विद्यालय-पेरई,नेवादा-कौशाम्बी
(जूनियर सेक्शन)
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