विद्यालय में स्थानीय त्योहार ढेढिया के पॉट पेन्टिंग
👷♀💐"विद्यालय में स्थानीय त्यौहार ढेढिया के साथ पॉटपेन्टिंग "💐👷
बच्चों के अन्दर कलात्मक अभिरूचि को अभिप्रेरित करने तथा स्थानीय त्योहार ढेढिया के प्रति बच्चों के अन्दर उत्सुकता को शान्त करनें एवं उसके महत्व से परिचित करानें के प्रति प्रयास करतेहुएआजदिनांक4/10/2017 को प्रा०वि०- पेरई में स्थानीय त्यौहार ढेढिया के बारे में बच्चों को विस्तृत रूप सेप्र०अ०हरीओम सिंह द्वारा बताया गया तथा बताते हुए कहा गया कि यह त्यौहार इलाहाबाद तथा कौशाम्बी का एक स्थानीय त्यौहार है। जिसे बहनें अपनें भाईयों की दीर्घायु के लिए मनाती हैं तथा रात में महिलायें ग्रुप में ढे़ढिया नृत्य करती हैं यह हर्सोल्लास का त्योहार है ।तथा ढेढिया लोकनृत्य ऐक विधा भी है इसके पीछे मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या वापस आनें पर खुशी की लहर दौड़ गयी और अयोध्यावासी महिलाओं नें श्री राम के स्वागत में मिट्टी के घडे़ पर दीया रखकर ढेढिया नृत्य करके खुशियाँ मनाई थी। इसके तहत विद्यालय की तरफ से मिट्टी से बनी ढेढिया उपलब्ध करायी गयी तदोपरान्त शिक्षिका बहिन प्रतिमाकुमारी जी के द्वारा बच्चों के साथ सहयोग करते हुए एक आकर्षक तरीके से ढे़ढिया की पेन्टिंग का कार्य कराया गया इसके उपरान्त अध्ययनरत् बालिकाओं ने समूह में ढेढिया नृत्य किया तथा नृत्य करनें के साथ विद्यालय में अध्ययनरत् अपनें सहपाठी भाईयों के ढेढिया उतार कर उनके दीर्घ आयु होनें की कामना किया। इस पूरे कार्य में सभी बच्चों ने तथा अन्य सहयोगी शिक्षिका बहनों श्रीमती शैलेन्द्र कुमारीजी एवं पूजा शाहू जीनें पूरे मनोंयोग के साथ सहयोग किया।
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📝हरीओमसिंह( प्र०अ०)
प्रा०वि०-पेरई, नेवादा-कौशाम्बी
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