खेल-खेल में समान सर वाली भिन्न का जोड़ तथा घटाना
💐खेल-खेल में समान हर वाली भिन्न का जोड़ तथा घटाना💐
💁🏻 प्राय: ऐसा अनुभव किया जाता है कि यदि किसी विषयवस्तु से सम्बंधित गतिविधियाँ उनके परिवेश और रूचि के आधार पर करायी जायें तो उन्हें कठिन से कठिन विषयवस्तु भी बोझिल नहीं लगेगी और रूचि के साथ सीखने का प्रयास भी करते है इसी-क्रम में आज *प्राथमिक विद्यालय🏡 पेरई नेवादा कौशाम्बी* के प्र0अ0👨🏫 *हरिओम सिंह* द्वारा कक्षा*3* के बच्चों 👦को खेल-खेल मेंसमान हर वाली भिन्न के जोड़ तथा घटाना सिखाया एवं छोटी तथा बड़ी भिन्न की पहिचान करना सिखाया गया इसके तहत
👉भिन्न के रूप में विद्यालय प्रांगण में चित्र चूने के द्वारा बच्चों👦 से बनवाया गया तथा इसके उपरान्त अंश की जगह पर खड़े होने वाले बच्चों 👦के मत्थे पर पीली पट्टी तथा लाल पट्टी एवं हर की जगह पर खड़े होने वाले बच्चों 👦के मत्थे पर नीली पट्टी तथा जोड़ की जगह पर खड़े होने वाले बच्चे 👦के मत्थे पर लाल पट्टी लगा दी गयी इसके उपरान्त प्र०अ०हरीओमसिंह द्वारा बोला गया कि पहली भिन्न के अंश के स्थान पर खड़ी बच्ची 7अंक की पर्ची लेकर खड़ी हो जाय तथा हर के स्थान पर खड़ी लड़की 8अंक लेकर खड़ी हो जाए बच्चों के द्वारा निर्धारित समय पर अंक ढूँढकर हर और अंश के स्थान पर खड़ी हो गयी इसी प्रकार दूसरी भिन्न के स्थान पर खड़ी अंश वाली बच्ची से बोलेगें की वह 9अंक तथा हर के स्थान पर खड़ी बच्ची से बोलेंगे कि वह 8 अंक लेकर खड़ी हो जाए तो बच्चे निर्धारित समय के अन्दर अंक ढूँढकर और खड़े हो जायेगें यदि निर्धारित समय के अन्दर नहीं खड़े होते हैं तो उन्हें 5अंक दिये जाते हैं यदि समय के अन्दर खड़े हो जातें हैं तो 10 अंक इसके उपरान्त लाल पट्टी वाले बच्ची से कहते हैं कि वह अंश के स्थान पर खड़ी दोनों बच्चियों के अंक को जोड़कर और बराबर के आगे बने अंश के गोले पर खड़ी हो जायेगी तथा हर के स्थान पर दोनों बच्चों में से एक बच्चा बराबर के आगे हर के स्थान पर खड़ा हो जायेगा इसके उपरान्त बराबर के बाहर अंश और हर पर केवल बच्चे खड़े रहेगें शेष सभी बच्चे बाहर हो जायेंगें इस प्रकार योग और घटाना दोनो बताया गया तथा साथ ही साथ उन्हें अंश और हर की भी पहिचान करना सिखाया गया तथा साथ ही साथ बड़ी और छोटी भिन्न की पहिचान करना भी बताया गया इस पूरे खेल में सर्वाधिक अंक पानें वाली बच्चियों को विजयी घोषित किया गया। इस प्रकार गतिविधि करायी गयी जिसमें पहली बार की विजेता शर्मिला रही तथा दूसरी बार की बिजेता तन्नू रही इस कार्य में मेरे साथ सहयोगी शिक्षिका बहिन प्रतिमाकुमारी जी ने तथा प्रतिभाग करने वाले बच्चों ने पूरी रूचि के साथ सहयोग किया।
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📝हरीओमसिंह प्र०अ०
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